सहारनपुर : हापुड़ में तैनात जिला पूर्ति अधिकारी (DSO) सीमा चौधरी कानूनी विवाद में घिर गई हैं। उनकी मां मुनेश रानी की शिकायत पर सहारनपुर के सरसावा थाने में सीमा चौधरी समेत पांच लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी, फर्जी दस्तावेज तैयार करने, आपराधिक साजिश और जान से मारने की धमकी देने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
आपको बता दें कि थाना सरसावा इलाके के गांव मीरपुर सीतापुर निवासी मुनेश रानी ने पुलिस को दी तहरीर में आरोप लगाया है कि उनकी बेटी सीमा चौधरी ने उनकी जानकारी और अनुमति के बिना गाजियाबाद स्थित आईसीआईसीआई बैंक में उनके नाम से संचालित खाते का इस्तेमाल किया। पीड़ित माँ के अनुसार खाते में करीब 15 लाख रुपये जमा कराए गए, लेकिन उन्हें इसकी कोई जानकारी नहीं दी गई। जब उनके मोबाइल पर बैंक का संदेश आया तो उन्हें लेनदेन का पता चला। बैंक पहुंचकर जानकारी लेने पर उन्हें पूरे मामले की जानकारी मिली। मुनेश रानी का आरोप है कि उनकी बेटी ने अपनी कथित “काली कमाई” को छिपाने के लिए उनके बैंक खाते का उपयोग किया। हालांकि, इस आरोप की पुष्टि अभी जांच के बाद ही हो सकेगी।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि सीमा चौधरी ने सरसावा निवासी संजीव चौधरी, बागपत के गांव मीरपुरा निवासी राजेंद्र राणा, सरसावा के गांव पहलवानपुर निवासी नरेश कुमार तथा एक अन्य व्यक्ति के साथ मिलकर उनकी जमीन हड़पने की साजिश रची। आरोप है कि 16 सितंबर 2023 की तारीख में एक कथित फर्जी रसीद तैयार की गई और उस पर उनके जाली हस्ताक्षर कर जमीन पर कब्जा करने का प्रयास किया गया। इस पूरे मामले की जानकारी उन्हें तहसील प्रशासन से मिली। मुनेश रानी का कहना है कि जब उन्होंने इसका विरोध किया तो उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई। भय और दबाव के कारण उन्हें अपनी जमीन देहरादून निवासी नैंसी को बेचनी पड़ी।
उन्होंने बताया कि सबसे पहले 13 मई को सरसावा थाने में शिकायत दी थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) से शिकायत की। एसएसपी के निर्देश पर 30 जून को सीमा चौधरी समेत पांच लोगों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धाराओं 420, 467, 468, 471 और 506 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। एसपी सिटी व्योम बिंदल का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है। बैंक खातों के रिकॉर्ड, जमीन से जुड़े दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों की जांच की जाएगी। जांच पूरी होने के बाद ही आरोपों की सत्यता स्पष्ट हो सकेगी।

